Labour law in india pdf act 1926 Hindi Full Details

Labour Law act in India PDF

(भारत में श्रम कानून अधिनियम)

Labour law in india pdf
Labour law in india pdf

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Labour law in india pdf: भारत में श्रम नीति नियोजन आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हुई है और इसके दो प्रमुख उद्देश्य हैं पहला औद्योगिक की शांति बनाए रखना और दूसरा श्रमिकों के कल्याण को प्रोत्साहन देना |

 कुछ तात्कालिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण श्रम क़ानूनों में संशोधन के लिए कदम उठाए हैं,ताकि उन्हें समय की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जा सके |  सन 1926 के ट्रेड यूनियन कानून में इस बात को ध्यान में रखकर संशोधन किए गए,  जिससे कि इनकी संख्या कम हो और व्यवस्थित विकास और उन में आंतरिक लोकतंत्र सुनिश्चित  किया जा सके औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 और मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936 में संशोधन की प्रक्रिया भी चल रही है|  इसके अलावा, ठेका मजदूर कानून के बारे में  मंत्रियों के दल ने विस्तार से चर्चा की है|  मंत्रियों के समूह इस विषय पर आगे चर्चा कर रहा है|  कारखाना अधिनियम 1948और खाद अधिनियम 1952 में संशोधन करने के बारे में विचार किया गया है  ताकि श्रमिकों की सुरक्षा स्वास्थ्य कल्याण और स्वच्छता की स्थिति में सुधार किया जा सके|  श्रम कानून की प्रक्रिया में वैध हितों की पूरी तरह रक्षक की जाएगी|

 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को न्याय-सी बोर्ड, कर्मचारी भविष्य निधि और  प्रकीर्ण  प्रावधान अधिनियम 1952  मैं कुछ संशोधनों के बारे में जांच कर रहा है,  ताकि छोटे उद्यमों में काम करने वाले मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की इसी तरह की ज़रूरतों पूरी की जा सके|

Labour Law in India pdf : न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के केंद्र और राज्य सरकारों के अंतर्गत अनुसूचित और अधिकारों में नियोजित श्रमिकों की मजदूरी के निर्धारण,  समीक्षा,  संशोधनों और  न्यूनतम मजदूरी लागू करने की व्यवस्था है|  केंद्र के अधीन अनुसूचित रोजगारो वालों की संख्या 45 है,  जबकि   राज्य क्षेत्र में इसकी संख्या 1,232 है|  जहां तक केंद्र क्षेत्र में अनुसूचित रोजगारो के लिए न्यूनतम मजदूरी में संशोधनों का सवाल है, खनन मजदूरों की मजदूरी के दौरे राजपत्र अधिसूचना संख्या एसओ (ई),  दिनांक 3 जनवरी 2002 के जरिए संशोधित की गई है,  और निर्माण कार्य में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी की दरों में गजट अधिसूचना एसो  113(ई) दिनांक 28 जनवरी 2007 के जरिए संशोधित किया गया है|

 एक समान राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी नहीं होने के कारण केंद्र ने 1996 में न्यूनतम मजदूरी के न्यूनतम राष्ट्रीय स्तर की नई अवधारणाओं को लागू किया,  जो कि राष्ट्रीय ग्रामीण आयोग 1990 की सिफारिशों और उनके बाद मूल स्तर में बढ़ोतरी पर आधारित है|  मजदूरी के न्यूनतम स्तर में अंतिम संशोधन 1 दिसंबर 2002 को किया गया था जिसके अंतर्गत उपरोक्त मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी के आधार पर इस से बढ़कर ₹50 कर दिया गया है| 

Labour Laws in India PDF : वेतन भुगतान अधिनियम, 1936

वेतन भुगतान अधिनियम 1936 उद्योगों में कार्यरत कुछ विशेष वर्गों के कर्मचारियों के वेतन भुगतान को नियमित करने के लिए बनाया गया था  इसका उद्देश्य वेतन में गैरकानूनी कटौती अथवा भुगतान के कारण देरी में उठे विवाद को तेजी से निकालना है| वर्तमान में  यह अधिनियम ₹1,600 प्रति माह से कम मजदूरी पाने वाले पर ही लागू होता है वेतन सीमा बढ़कर ₹6,500 करने का कुछ समय विसंगतियों/ कमजोरियों को दूर करने के लिए वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक 2002, ‘16 मई 2002’ को राज्यसभा में पेश किया गया|  वहां से विधायक श्रम एवं स्थाई समिति को भेज दिया गया, जिसमें 21 नवंबर को अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी |  स्थाई समिति की सिफारिशों पर सरकार द्वारा विचार किया जा रहा है|

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Labour law in india pdf: ठेका मजदूर अधिनियम 1970

ठेका मजदूर (विनिमय और उन्मूलन) अधिनियम 1970 का उद्देश्य कुछ खास प्रतिष्ठानों में ठेका श्रमिकों को काम पर रखने को विनियमित कारण और कुछ परिस्थितियों तथा उनसे संबंधित मामलों में इसका उन्मूलन करता है|  यह अधिनियम और ठेका मजदूर (विनिमय और उन्मूलन) केंद्रीय नियम, 10 फरवरी 1971 से लागू हुए |  इस अधिनियम में,  अधिनियम को लागू करने के परिणाम स्वरूप उत्पन्न हुए मामलों के बारे में संबंधित कार्य सरकारों को परामर्श देने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर ठेका श्रमिक बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया है | अधिनियम में ठेकेदार द्वारा श्रमिकों मजदूरी के भुगतान और कुछ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं| 

Labour Law in India Pdf: बाल – श्रमिक 

भारत में बाल श्रमिकों की समस्या सुलझाने के लिए हमेशा से प्रभावशाली नीतियां अपनाई हैं,  और बाल श्रमिकों निपटाने के लिए हमेशा संवैधानिक कानूनी और विकासात्मक उपायों के पक्ष में कदम उठाए गए हैं|  बाल श्रमिक (निषेध और नियमन) अधिनियम, 1986 में जोखिम वाले  विषयों में बच्चों के काम करने की मनाही के अलावा,  कुछ अन्य क्षेत्रों में भी उनको काम देने से संबंध नियम बनाए गए हैं|  अधिनियम में 13 व्यवसाय और 57 प्रक्रिया में बाल श्रमिक काम  पर लगाने की मनाही है|  राष्ट्रीय कानूनों और विनय में अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के समकक्ष करने के लिए,  अब तक बाल श्रमिक समकक्ष तथा मामलों के बारे में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने छह संधियों की पुष्टि की जा चुकी है|

 वर्ष 1987 में बाल श्रम के बारे में एक राष्ट्रीय नीति बनाई गई,  जिसमें बाल श्रमिकों के लाभ के लिए कानूनी प्रावधानों को लागू करने के अलावा सामान्य विकास कार्यक्रमों की अधिकता वाले क्षेत्र में परियोजना आधारित कार्य योजना पर ध्यान देने जैसी बातें शामिल की गई हैं|  दीर्घावधि सफलता के लिए बच्चों के विकास और उनकी शिक्षा के महत्व को समझते हुए,  सरकार ने दो विषय कार्य योजनाएं आरंभ कि है : (i)  राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना और (ii)  बाल श्रमिकों के लाभ और कल्याण के लिए अद्भुत सहायता योजना |

  Labour law in india pdf: महिला श्रमिक

उच्चतम न्यायालय ने 13 अगस्त 1977 को अपने ऐतिहासिक फैसले के कार्य स्थलों पर महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए व्यापक दिशानिर्देश  मानदंड तैयार किए |  निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर लागू करने के बाद से औद्योगिक रोजगार (स्थाई आदेश) अधिनियम 1946 में आवश्यक संशोधन किया गया है|

Labour law in india pdf: बंधुआ मजदूर

  बंधुआ मजदूरी का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में उस समय  प्रमुख रूप से सामने आया, जब 1975 में इसे 20 सूत्री कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया | बना मजदूरी को समाप्त करने के लिए बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन)  अध्यादेश जारी किया गया|  बाद में इसका स्थान लेने के लिए बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 लाया गया |  इससे बंधुआ मजदूरों के ऋणों की समाप्ति के साथ  उन्हें एक तरफा रूप से बंधुआ मजदूरी से मुक्त कर दिया गया|

 केंद्रीय योजना मई 2002 में संशोधित संशोधित  की गई थी |  संशोधित योजना  में प्रति बंधुआ मजदूर पुनर्वास सहायता को ₹10000 से बढ़ाकर ₹20000 के साथ-साथ  राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की जागरूकता बढ़ाने,  बंधुआ मजदूरी के सर्वेक्षण और आकलन संबंधी अध्ययनों के लिए केंद्रीय अनुदान देने का प्रावधान भी किया गया|

 Labour law in india pdf: ट्रेड यूनियन अधिनियम

 ट्रेड यूनियन अधिनियम,  1926 में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के  संघ (यूनियनों) के पंजीकरण का प्रावधान है और कुछ हद तक किया अधिनियम पंजीकृत मजदूर संघ से संबंधित कानून को परिभाषित करता है|  यह पंजीकृत संगठन को कानूनी और  निर्गमित दर्जा प्रदान करता है|  ट्रेड यूनियन अधिनियम,   1926 को संबंध राज्य सरकार द्वारा लागू किया जाता है| 

  • ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 में संशोधित किया गया और 9 जनवरी 2002 से निम्नलिखित संशोधन लागू किया गया |
  •  किसी भी कर्मचारी संघ को तब तक पंजीकृत नहीं किया जाएगा जब तक प्रतिष्ठान या उद्योग में नियोजित कुल  श्रमिक या कर्मचारियों का कम से कम 10% या 100 कर्मचारी जो कि हम हो, प्रस्तावित ट्रेड  यूनियन द्वारा पंजीकरण के आवेदन की तारीख को उनके सदस्य ना हो | सात से कम  सदस्य वाली किसी यूनियन का पंजीकरण नहीं किया जाएगा 
  • पंजीकरण ट्रेड यूनियन के सदस्यों की संख्या किसी भी समय  संबंध प्रतिष्ठान या उद्योग में कार्यरत कुल  श्रमिकों को 10% या 100 जो भी कम हो लेकिन न्यूनतम 7 से कम नहीं होनी चाहिए |
  •  पंजीकरण ना होने/ पंजीकरण बहाल किए जाने के मामले में औद्योगिक ट्रिब्यूनल/ श्रमिक अदालत में अपील दायर करने का प्रावधान है|
  •  किसी पंजीकृत ट्रेड यूनियन की कार्यकारिणी के पदाधिकारी की संख्या एक तिहाई या पांच, जो भी कम हो, सदस्यों को छोड़कर सभी पदाधिकारी उद्योग या प्रतिष्ठान में कार्यरत होने चाहिए|
  •  मजदूर संघ के सदस्यों द्वारा दी जाने वाले चंदे की न्यूनतम राशि संशोधित करने का प्रावधान है|  ग्रामीण श्रमिकों के लिए ₹1 वार्षिक,  असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए ₹3 वार्षिक व अन्य सभी मामलों में 12 रुपये वार्षिक होगी|

 Labour law in india pdf: श्रमिक मुआवजा अधिनियम 1923

 श्रमिक मुआवजा अधिनियम पारित होने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा की शुरुआत हुई|  इसके अंतर्गत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को अपने सेवाकाल के दौरान किसी दुर्घटना में मृत्यु या अपंग होने की स्थिति में मुआवजा देने का प्रावधान है|  यह अधिनियम रेलवे कर्मचारी और अधिनियम की अनुसूचित दो में निर्दिष्ट किया पर कार्यरत व्यक्तियों पर लागू होता है|  अनुसूची दो  कारखानों,खानों, बागानों मशीन से चलने वाला सामानों के संचालन, निर्माण कार्य और जोखिम वाले व्यवसाय में  कार्यरत  व्यक्ति शामिल है|  अस्थाई व पूर्ण विकलांगता होने पर न्यूनतम मुआवजा राशि ₹90,000 मृत्यु होने पर ₹80,000 निर्धारित की गई थी कर्मचारी की  आयु और वेतन के हिसाब से,  मृत्यु होने पर अधिकतम मुआवजा 4.56 लाख रुपये  और अस्थाई पूर्ण विकलांगता होने पर 5.48 लाख रुपये निर्धारित किया गया था |

 Labour law in india pdf: कर्मचारी राज्य बीमा योजना

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम बिजली का इस्तेमाल करने वाले एप्स गैर मौसमी कारखानों में लागू होता है|  इस अधिनियम के तहत ऐसे कारखाने भी आते हैं जहां विद्युत का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और जहां 20 से अधिक  कर्मचारी कार्यरत हैं|  अधिनियम का विस्तार राज्य सरकार द्वारा 20 या इससे अधिक कर्मचारी वाले अन्य प्रतिष्ठानों  जैसे:-  दुकान, hotel,restaurant, सिनेमाघर, थिएटर,सड़क मोटर परिवहन प्रतिष्ठान और समाचार प्रतिष्ठानों में भी किया जा रहा है|  इस अधिनियम के तहत कर्मचारी को आकस्मिक बीमारी,  प्रसूति,  काम के दौरान घायल होने की अवस्था में इलाज का प्रबंध और नगद  भत्ता देने तथा काम करते समय घायल होने के कारण मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को पेंशन देने का प्रावधान है|  बीमा- शुदा  व्यक्ति के परिवार को अस्पताल के इलाज के साथ-साथ पूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है|

  ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम

 ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 कारखानों, खानों ,  तेल क्षेत्रों,  बागानों,  बंदरगाहों,  रेलवे,  मोटरों,  परिवहन प्रतिष्ठानों,  कंपनियों, दुकानों  और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होता है|  अधिनियम के अनुसार हर वर्ष के सेवाकाल पर कर्मचारी को 15 दिन का वेतन  ग्रेच्युटी के रूप में दिया  जाता है|  बशर्ते कि यह रकम ₹3,50,000 से अधिक ना हो|  जिन प्रतिष्ठानों में विशेष सीजन में काम होता है,   उनमें में हर सीजन के 7 दिन तक वेतन के बराबर ग्रेच्युटी दी जाती है|  अगर किसी कर्मचारी को अपने मालिक के साथ किए गए समझौते या अनुबंध के अंतर्गत बेहतर शर्तों पर ग्रेच्युटी मिलती है तो अधिनियम में कर्मचारी के अधिकारी पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है|

 कर्मचारी भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम

 कर्मचारी भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम 1952 के अंतर्गत कर्मचारियों को सेवानिवृत्त पर कई प्रकार के लाभ उपलब्ध हैं|  इनमें भविष्य निधि पारिवारिक पेंशन और जमा राशि से जुड़ा बीमा शामिल हैं

 जमा राशि से जुड़ी कर्मचारी बीमा योजना

 सामाजिक सुरक्षा की एक अन्य महत्वपूर्ण योजना,  जमा राशि से जुड़ी कर्मचारी बीमा योजना, 1976 है | कर्मचारी भविष्य निधि और छुट प्राप्त  भविष्य निधियों के सदस्य के लिए  1 अगस्त, 1976 से लागू किया गया|  इसके अनुसार कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके उत्तराधिकारी को भविष्य निधि में जमा धनराशि के अतिरिक्त,  वह धनराशि मिलेगी जो पिछले 12 महीनों में निधि में जमा  औसत  अधिशेष के बराबर होगी |  इस योजना के अंतर्गत अधिकतम भुगतान ₹60000 होगा और इसके लिए कर्मचारी को कोई अनुदान नहीं करना होगा |

 Labour law in india pdf: कर्मचारी पेंशन योजना 1995 

 कर्मचारी पेंशन योजना, 1995,   औद्योगिक कर्मचारियों के लिए शुरू की गई | योजना के तहत कर्मचारी को सेवानिवृत्त अथवा 33 वर्ष की सेवा पूरी होने पर वेतन का 50% पेंशन के रूप में देने का प्रावधान है|  पेंशन के लिए कम से कम 10 वर्ष की सेवा जरूरी है|  निधन के समय कर्मचारी के वेतन और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत से ₹450 प्रति माह से 2500 ₹ प्रति माह पारिवारिक पेंशन देने की भी व्यवस्था है|  इसके अलावा दो बच्चों के लिए विधवा पेंशन की 25% राशि प्रत्येक बच्चे को देने का भी  प्रावधान हैं लेकिन यह  राशि ₹150 प्रत्येक बालक से कम नहीं होनी चाहिए |  इस योजना के लिए धन की व्यवस्था के लिए भविष्य निधि में नियोक्ता की ओर से दी जाने वाली मासिक वेतन का 8.33%  राशि को पेंशन फंड में जमा करा दिया जाता है इसके अलावा केंद्र सरकार वेतन का 1.16% के बराबर योगदान करती है 1 जून 2001 से अधिकतम राशि ₹5000 से बढ़ाकर ₹6500 कर दी गई है|

 अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के बेरोजगारों के लिए कार्यक्रम

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के प्रति ग्राहकों के लिए दिल्ली, चेन्नई, कानपुर, जयपुर, हैदराबाद, तिरुअनंतपुरम, सूरत, जबलपुर, राँची, कोलकाता, आइजोल, बेंगलुरु, हिसार, भुवनेश्वर, इंफाल, नागपुर, मंडी, गुवाहाटी, कोहिमा, जोवाई, और जम्मू तथा जालंधर, मैं प्रशिक्षण और मार्ग निर्देशक केंद्र कार्यरत हैं जो उनके लिए पंजीकरण, मार्ग-निर्देशक आवेदन पूर्व परामर्श, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण,भर्ती-पूर्व प्रशिक्षण और टंकण तथा आशुलिपि में विशेष कोचिंग उपलब्ध कराते हैं| 

Labour law in india pdf: राष्ट्रीय श्रम आयोग 

प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग 24 दिसम्बर, 1966 को गठित किया गया था, जिसने संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्र में श्रम समस्याओ के सभी पहलुओं के विस्तृत अध्यन के बाद 1969  में अपने रिपोर्ट दी | निम्न्लिखित  कारणों  से दूसरे राष्ट्रीय श्रम आयोग के गठन की आवश्यकता महसूस की गई : (i) प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग की स्थापना के बाद से तीन दशकों की अवधि के दौरान औद्योगिक तथा शहरी-करण की रफ्तार के कारण श्रम शक्ति में वृद्धि हुई है| (ii) 1991 में नई  आर्थिक नीति लागू होने के बाद देश में आर्थिक वातावरण में परिवर्तन हुए हैं,  जिससे घरेलू औद्योगिक परिवेश और श्रम बाजार में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं| (iii)  कार्यस्थल पर उद्योग में और बाजार के स्वरूप में,  कार्य के घंटे में बदलाव आए हैं तथा श्रम संबंधों में जबरदस्त परिवर्तन आए हैं|  इन परिवर्तनों से श्रम बाजार में कुछ अनिश्चितता उत्पन्न हुई हैं,  जिनके कारण श्रम कानूनों को नया रूप देना जरूरी हो गया है| 

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